जब कोई आदमी अपना पक्का घर बनाना चाहता है या शहर में छोटा सा मकान लेना चाहता है, तब उसके पास पूरा पैसा एक साथ नहीं होता। ऐसे में बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी से पैसा उधार लिया जाता है, इसी को होम लोन कहते हैं। मान लीजिए आपने बैंक से ₹20 लाख लिया। बैंक यह पैसा मुफ्त में नहीं देता, वह हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा और उसका ब्याज मिलाकर वापस लेता है। इसी हर महीने दिए जाने वाले पैसे को EMI कहते हैं। EMI का मतलब होता है हर महीने की किस्त। अब यही किस्त कितनी बनेगी, यही पूरा गणित आगे समझते हैं।
EMI कैसे तय होती है, इसे सीधे शब्दों में समझिए
EMI तीन चीज़ों पर टिकी होती है। पहला आपने बैंक से कितना पैसा लिया, दूसरा बैंक कितने साल के लिए पैसा दे रहा है और तीसरा बैंक कितना ब्याज ले रहा है। मान लीजिए बैंक ने आपको ₹20 लाख दिए, समय दिया 20 साल का और ब्याज रखा 9 प्रतिशत सालाना। अब बैंक यही पैसा 20 साल में बराबर किस्तों में वसूल करेगा। हर महीने पहले ब्याज ज़्यादा होता है और असली पैसा कम कटता है, फिर धीरे-धीरे ब्याज घटता जाता है और मूल रकम ज़्यादा कटने लगती है।
₹20 लाख लोन पर EMI का पूरा देहाती हिसाब
अब मान लेते हैं कि बैंक का ब्याज 9 प्रतिशत सालाना है और समय 20 साल का है। 20 साल मतलब पूरे 240 महीने। बैंक साल का ब्याज महीनों में बाँट देता है, यानी करीब 0.75 प्रतिशत महीना। अब बैंक एक फार्मूला लगाता है, लेकिन आम आदमी को फार्मूला समझने की जरूरत नहीं। सीधे समझिए कि ऐसे हालात में आपकी EMI करीब ₹18,000 से ₹18,500 के बीच बनेगी। यानी हर महीने आपको लगभग उतना पैसा बैंक को देना होगा, जैसे किसी ट्रैक्टर की किस्त या बाइक की किस्त दी जाती है, बस रकम थोड़ी बड़ी होती है।
20 साल में कुल कितना पैसा जाएगा
अब ज़रा ध्यान से समझिए, यहीं पर असली बात छुपी होती है। आपने बैंक से लिए ₹20 लाख, लेकिन 20 साल में बैंक को आप लगभग ₹43 से ₹44 लाख वापस कर देते हैं। मतलब करीब ₹23–24 लाख सिर्फ ब्याज के रूप में चला जाता है। यही वजह है कि लोग कहते हैं कि लोन सोच-समझकर लेना चाहिए। EMI छोटी लगती है, लेकिन सालों में जोड़ने पर पैसा बहुत बन जाता है।
ब्याज थोड़ा सा बढ़े या घटे तो क्या फर्क पड़ता है
अगर ब्याज 9 प्रतिशत की जगह 10 प्रतिशत हो जाए तो EMI सीधे ₹1,500–2,000 रुपये बढ़ जाती है। इसी तरह अगर ब्याज 8 प्रतिशत हो जाए तो EMI कुछ कम हो जाती है। इसलिए लोन लेते समय बैंक का ब्याज बहुत ध्यान से देखना चाहिए। कई बार बैंक सस्ता लोन बोलकर बाद में ब्याज बढ़ा देते हैं, जिससे आदमी की जेब पर बोझ बढ़ जाता है।
नीचे एक आसान टेबल से समझिए पूरा हिसाब
| लोन राशि | ब्याज दर | समय | महीने की EMI | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|---|
| ₹20 लाख | 9% | 20 साल | ₹18,200 लगभग | ₹43.5 लाख |
यह टेबल देखकर साफ समझ आता है कि हर महीने की किस्त भले कम लगे, लेकिन लंबे समय में पैसा दोगुना से भी ज्यादा चला जाता है।
EMI कम करनी है तो देहाती तरीका क्या है
अगर आपकी आमदनी ठीक-ठाक है और कभी-कभी एक्स्ट्रा पैसा हाथ में आता है, तो साल में एक-दो बार थोड़ा पैसा अलग से बैंक में जमा कर दीजिए। इसे प्रीपेमेंट कहते हैं। इससे या तो EMI कम हो जाती है या लोन का समय घट जाता है। समय घटेगा तो ब्याज बहुत बचता है। यही तरीका समझदार लोग अपनाते हैं।
होम लोन लेने से पहले कौन सी बात गांठ बांध लें
लोन लेने से पहले यह देख लें कि आपकी EMI आपकी कमाई के आधे से ज्यादा न हो। अगर आपकी महीने की कमाई ₹30,000 है तो EMI ₹15,000 से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। वरना घर का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और दवा-दारू सब बिगड़ सकता है। लोन ऐसा हो कि चैन की नींद बनी रहे।
नया डिस्क्लेमर
यह लेख केवल समझाने के लिए लिखा गया है। EMI, ब्याज और कुल रकम बैंक, समय और नियम के हिसाब से बदल सकती है। लोन लेने से पहले अपने बैंक या वित्तीय सलाहकार से सही जानकारी जरूर लें।