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Business Idea (Gaon): खेती के साथ ₹30 हजार महीना कमाने वाला देहाती काम

आज के समय में गाँव में रहकर सिर्फ खेती पर निर्भर रहना मुश्किल होता जा रहा है। मौसम कब धोखा दे दे, पता नहीं चलता। कभी बारिश ज्यादा हो जाती है तो कभी बिल्कुल नहीं होती। ऐसे में बहुत से किसान चाहते हैं कि खेती के साथ कोई ऐसा देहाती काम हो जाए, जिससे हर महीने पक्की कमाई आती रहे। अगर आप भी यही सोच रहे हैं तो यह बिजनेस आइडिया आपके लिए है। इस काम को खेती के साथ आसानी से किया जा सकता है और सही तरीके से करने पर ₹25 से ₹30 हजार महीना कमाना भी संभव है।

यह देहाती काम है गाय-भैंस का गोबर और फसल के बचे हुए भूसे से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाना। यह काम गाँव के माहौल के हिसाब से एकदम सही बैठता है क्योंकि कच्चा माल खेत और घर से ही मिल जाता है और बाजार भी आजकल बहुत अच्छा है।

वर्मी कम्पोस्ट क्या होता है और क्यों बिकता है

वर्मी कम्पोस्ट एक तरह की जैविक खाद होती है, जो केंचुओं की मदद से बनाई जाती है। इसमें गाय-भैंस का गोबर, सूखा पुआल, सब्जियों के छिलके और खेत का बेकार कचरा डाला जाता है। केंचुए इसे खाकर जो खाद बनाते हैं, वही वर्मी कम्पोस्ट कहलाती है। यह खाद जमीन को उपजाऊ बनाती है और फसल की पैदावार बढ़ाती है। आजकल किसान रासायनिक खाद से परेशान हो चुके हैं, इसलिए जैविक खाद की मांग तेजी से बढ़ रही है।

शहरों के लोग भी अब जैविक सब्जी और अनाज खाना चाहते हैं, इसी वजह से किसान वर्मी कम्पोस्ट का ज्यादा इस्तेमाल कर रहे हैं। यही कारण है कि इस खाद का बाजार हर साल बढ़ता जा रहा है।

इस देहाती काम की शुरुआत कैसे करें

इस काम को शुरू करने के लिए बहुत ज्यादा पढ़ाई या मशीनों की जरूरत नहीं होती। गाँव में थोड़ी सी खाली जगह हो, चाहे वह खेत का कोना हो या घर के पीछे की जमीन, वहीं से काम शुरू किया जा सकता है। सबसे पहले एक छायादार जगह चुननी होती है ताकि धूप और बारिश सीधे खाद पर न पड़े। जमीन पर ईंट या कच्चा फर्श बना लिया जाता है, जिससे पानी नीचे न जाए।

इसके बाद गाय या भैंस का पुराना गोबर इकट्ठा किया जाता है और उसे कुछ दिन सड़ा दिया जाता है। फिर उसमें सूखा भूसा या पुआल मिलाया जाता है। जब यह मिश्रण तैयार हो जाए, तब इसमें केंचुए छोड़े जाते हैं। कुछ ही हफ्तों में केंचुए इस कचरे को अच्छी खाद में बदल देते हैं।

लागत कितनी आती है और सामान कहां से मिलेगा

इस देहाती बिजनेस की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें खर्च बहुत कम आता है। गाँव में जिनके पास पशु हैं, उनके लिए तो गोबर मुफ्त में मिल जाता है। भूसा भी खेत से ही आ जाता है। केंचुए स्थानीय कृषि विभाग या किसी किसान से सस्ते में मिल जाते हैं।

शुरुआत में आपको बस छाया बनाने, थोड़ी ईंट-मिट्टी और केंचुए खरीदने का खर्च करना होता है। कुल मिलाकर 10 से 15 हजार रुपये में यह काम आराम से शुरू हो सकता है। इसके बाद हर महीने खाद बनती रहती है और कमाई शुरू हो जाती है।

महीने की कमाई कैसे ₹30 हजार तक पहुंचती है

अब सबसे जरूरी सवाल यह है कि इससे पैसे कैसे बनते हैं। आमतौर पर वर्मी कम्पोस्ट 8 से 12 रुपये किलो तक बिक जाती है। अगर आप महीने में 3 टन यानी 3000 किलो खाद भी बनाते हैं, तो 9 रुपये किलो के हिसाब से करीब 27 हजार रुपये की बिक्री हो जाती है। इसमें से थोड़ा बहुत खर्च निकालकर भी 25 हजार रुपये तक की बचत आराम से हो सकती है।

जैसे-जैसे अनुभव बढ़ता है, उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है। कुछ किसान 5 से 6 टन तक खाद बना लेते हैं और 40 हजार से ज्यादा कमा रहे हैं।

कमाई और खर्च का देहाती हिसाब

नीचे एक साधारण टेबल दी गई है, जिससे आपको महीने का पूरा हिसाब आसानी से समझ आ जाएगा।

खर्च और कमाई का विवरणअनुमानित राशि (रुपये में)
शुरुआती खर्च (एक बार)12,000
महीने का कच्चा माल खर्च3,000
महीने में खाद उत्पादन3,000 किलो
औसत बिक्री भाव9 रुपये किलो
महीने की कुल बिक्री27,000
महीने की शुद्ध बचत24,000 से 25,000

यह आंकड़े इलाके और बाजार के हिसाब से थोड़े ऊपर-नीचे हो सकते हैं, लेकिन मोटा-मोटा हिसाब यही रहता है।

वर्मी कम्पोस्ट बेचें कहां और किसे

इस खाद को बेचने के लिए बहुत दूर जाने की जरूरत नहीं पड़ती। आसपास के किसान ही सबसे बड़े ग्राहक होते हैं। आप अपने गांव, पास के गांव और हाट-बाजार में आसानी से बेच सकते हैं। इसके अलावा कृषि विभाग, नर्सरी और जैविक खेती करने वाले लोग भी अच्छे दाम पर खाद खरीद लेते हैं।

अगर थोड़ा स्मार्ट तरीके से काम किया जाए तो खाद को बोरी में भरकर उस पर अपना नाम और मोबाइल नंबर लिख दिया जाए। इससे ग्राहक दोबारा भी संपर्क करते हैं और काम धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।

खेती के साथ यह काम क्यों सबसे सही है

यह देहाती काम खेती के साथ इसलिए सबसे अच्छा है क्योंकि इसमें ज्यादा समय नहीं लगता। सुबह-शाम थोड़ा समय देकर खाद को नमी देना और देखभाल करना होता है। बाकी समय आप अपने खेत का काम कर सकते हैं। इससे खेती का कचरा भी काम में आ जाता है और खेत के लिए अच्छी खाद भी खुद ही मिल जाती है।

इस तरह यह काम खेती की लागत भी कम करता है और अलग से कमाई का जरिया भी बन जाता है।

गांव के युवाओं और महिलाओं के लिए मौका

इस बिजनेस को गांव के युवा, महिलाएं और बुजुर्ग भी कर सकते हैं। इसमें भारी मेहनत नहीं होती और समझने में भी आसान है। अगर गांव की महिलाएं मिलकर यह काम करें तो यह एक अच्छा समूह काम बन सकता है, जिससे पूरे गांव को फायदा होता है।

जरूरी सूचना / डिस्क्लेमर

यह लेख केवल सामान्य जानकारी और देहाती अनुभव पर आधारित है। कमाई, खर्च और मुनाफा जगह, मेहनत और बाजार पर निर्भर करता है। कोई भी काम शुरू करने से पहले स्थानीय कृषि विभाग या जानकार किसान से सलाह जरूर लें। लेखक किसी भी तरह की कमाई की गारंटी नहीं देता।

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