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Car Loan: ₹5 लाख की गाड़ी पर कितनी EMI कटेगी, देहाती हिसाब पहले समझ लो

आज के समय में गाड़ी रखना शौक नहीं बल्कि जरूरत बन गया है। गांव हो या कस्बा, शहर जाना हो, बच्चों को स्कूल छोड़ना हो या खेत-खलिहान का काम, हर जगह गाड़ी काम आती है। लेकिन सीधे ₹5 लाख की गाड़ी नकद लेना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इसलिए लोग कार लोन लेते हैं। कार लोन सुनते ही दिमाग में सबसे पहला सवाल आता है – हर महीने कितनी EMI कटेगी और कुल कितना पैसा देना पड़ेगा। इसी बात को हम यहां बिल्कुल देहाती और आसान भाषा में समझेंगे, ताकि कोई भी बिना गणित के डर के इसे समझ सके।

कार लोन क्या होता है, पहले यह समझ लो

कार लोन का मतलब है बैंक या फाइनेंस कंपनी से गाड़ी खरीदने के लिए पैसा लेना। बैंक आपको पूरी या कुछ रकम देता है और आप हर महीने थोड़ा-थोड़ा पैसा EMI के रूप में लौटाते हैं। इस EMI में दो चीजें होती हैं, एक असली पैसा जो आपने लिया और दूसरा ब्याज, यानी बैंक का मुनाफा। जितना समय ज्यादा, उतना ब्याज ज्यादा देना पड़ता है, यह बात हमेशा याद रखनी चाहिए।

₹5 लाख की गाड़ी का देहाती हिसाब

मान लो आपने ₹5 लाख की गाड़ी ली। बैंक ने आपसे कहा कि ब्याज साल का करीब 9 प्रतिशत लगेगा और लोन 5 साल के लिए है। अब देहाती हिसाब से समझो। ₹5 लाख को 60 महीनों में बांट दिया गया। ऊपर से बैंक हर महीने थोड़ा ब्याज भी जोड़ता है। ऐसे में EMI कोई जादू नहीं, बस महीनों में पैसा बांटने का तरीका है। आम तौर पर ऐसी हालत में EMI करीब ₹10,000 से ₹10,500 के बीच आती है। यानी हर महीने आपको लगभग उतना पैसा अलग रखना होगा, जितना एक परिवार का राशन और बिजली-पानी मिलाकर खर्च होता है।

EMI क्यों बढ़ती या घटती है

बहुत से लोग सोचते हैं कि EMI हमेशा एक जैसी क्यों नहीं होती। इसकी वजह है ब्याज और समय। अगर आप वही ₹5 लाख 3 साल में चुकाओगे तो EMI ज्यादा आएगी, क्योंकि समय कम है। अगर 7 साल में चुकाओगे तो EMI कम होगी, लेकिन कुल पैसा ज्यादा देना पड़ेगा। देहाती भाषा में कहें तो उधार जितने दिन रखोगे, उतना ज्यादा सूद लगेगा।

एक नजर में हिसाब समझो

नीचे एक साधारण तालिका दी गई है, जिससे आपको फर्क साफ दिखेगा।

लोन राशिसमयअनुमानित ब्याजलगभग EMI
₹5,00,0003 साल9%₹15,900
₹5,00,0005 साल9%₹10,400
₹5,00,0007 साल9%₹8,100

इस तालिका से साफ है कि EMI कम करने के चक्कर में समय बढ़ाओगे तो कुल खर्च बढ़ जाएगा। इसलिए फैसला सोच-समझकर करना चाहिए।

डाउन पेमेंट का असर

अगर आप शुरुआत में कुछ पैसा अपनी जेब से दे दो, जिसे डाउन पेमेंट कहते हैं, तो EMI हल्की हो जाती है। मान लो आपने ₹1 लाख पहले ही दे दिया और ₹4 लाख का लोन लिया। अब ब्याज ₹4 लाख पर लगेगा, ₹5 लाख पर नहीं। इससे EMI भी कम होगी और कुल पैसा भी कम देना पड़ेगा। देहात में जैसे बैल खरीदते समय थोड़ा पैसा पहले दे दो तो उधार हल्का पड़ता है, वही बात यहां भी है।

EMI चुकाने से पहले अपनी आमदनी देखो

गाड़ी लेने का फैसला दिल से नहीं, हिसाब से करना चाहिए। अगर आपकी महीने की कमाई ₹20,000 है और EMI ₹10,000 हो गई, तो घर चलाना मुश्किल हो सकता है। सही तरीका यह है कि EMI आपकी कमाई का एक तिहाई से ज्यादा न हो। इससे आप आराम से लोन भी चुकाओगे और घर का खर्च भी चलेगा।

लोन लेते समय किन बातों का ध्यान रखें

कार लोन लेते समय सिर्फ EMI मत देखो। यह भी देखो कि बैंक कोई छुपा हुआ चार्ज तो नहीं ले रहा। फाइल चार्ज, बीमा और देर से किश्त देने पर लगने वाला जुर्माना भी समझ लो। कई बार EMI कम दिखती है लेकिन बाद में खर्च निकल आता है। देहाती समझ से कहें तो सौदा करते समय पूरी बात साफ कर लेना चाहिए।

समय से EMI देना क्यों जरूरी है

अगर EMI समय पर नहीं दोगे तो बैंक जुर्माना लगाएगा और आपका नाम खराब हो जाएगा। आगे चलकर आपको कोई और लोन चाहिए होगा तो मुश्किल होगी। इसलिए EMI को ऐसे समझो जैसे खेत की सिंचाई, समय पर कर दी तो फसल अच्छी, देर हुई तो नुकसान।

आखिर में समझदारी की बात

₹5 लाख की गाड़ी लेना बुरा नहीं है, लेकिन EMI का बोझ समझना बहुत जरूरी है। अगर आपकी आमदनी ठीक है, खर्च काबू में है और EMI आराम से निकल सकती है, तभी गाड़ी लो। वरना गाड़ी खुशी देने के बजाय सिरदर्द बन सकती है। देहाती हिसाब यही कहता है कि पहले जेब देखो, फिर सौदा करो।

डिस्क्लेमर
यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए लिखा गया है। EMI, ब्याज दर और शर्तें बैंक और समय के हिसाब से बदल सकती हैं। गाड़ी या लोन लेने से पहले अपने नजदीकी बैंक या फाइनेंस कंपनी से पूरी जानकारी जरूर लें और अपनी कमाई व जरूरत को ध्यान में रखकर फैसला करें।

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