गांव में जब अचानक पैसों की जरूरत पड़ती है, जैसे बीमारी, शादी, खेती में नुकसान या घर की मरम्मत, तब सबसे पहले दिमाग में पर्सनल लोन का ख्याल आता है। ₹1 लाख का पर्सनल लोन लेना आजकल आसान हो गया है। बैंक और ऐप दोनों ही जल्दी पैसा दे देते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह सही फैसला है? गांव के लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि लोन लेना मदद भी है और बोझ भी बन सकता है। अगर कमाई पक्की नहीं है और हर महीने की आमदनी तय नहीं है, तो EMI देना मुश्किल हो सकता है। इसलिए लोन लेने से पहले पूरी सच्चाई जानना बहुत जरूरी है।
पर्सनल लोन क्या होता है और कैसे मिलता है
पर्सनल लोन ऐसा कर्ज होता है जिसमें आपको कोई चीज गिरवी नहीं रखनी पड़ती। बैंक आपके कागज और कमाई देखकर पैसा देता है। गांव में जिन लोगों की बैंक में लेन-देन की हिस्ट्री ठीक है, उनको लोन जल्दी मिल जाता है। कई बार बैंक 12% से 20% तक ब्याज लेता है। कुछ ऐप इससे भी ज्यादा लेते हैं। ₹1 लाख का लोन लेने पर आपको सिर्फ 1 लाख नहीं, बल्कि ब्याज जोड़कर ज्यादा पैसा लौटाना पड़ता है। यही बात लोग जल्दी में समझ नहीं पाते।
₹1 लाख लोन पर कितनी EMI बनेगी
अगर आप ₹1 लाख का लोन 3 साल के लिए लेते हैं और ब्याज 15% सालाना है, तो हर महीने लगभग 3,470 रुपये EMI बन सकती है। कुल मिलाकर आपको करीब 1,25,000 रुपये वापस देने पड़ेंगे। नीचे एक साधारण हिसाब दिया गया है ताकि गांव का कोई भी व्यक्ति समझ सके।
| लोन राशि | ब्याज दर | समय | अनुमानित EMI | कुल भुगतान |
|---|---|---|---|---|
| ₹1,00,000 | 15% सालाना | 3 साल | ₹3,470 लगभग | ₹1,25,000 लगभग |
यह सिर्फ एक उदाहरण है। ब्याज कम या ज्यादा होने पर रकम बदल सकती है।
कब लेना सही हो सकता है
अगर पैसा ऐसी जरूरत के लिए है जिससे आपकी कमाई बढ़े, जैसे छोटा व्यापार शुरू करना, डेयरी लेना, या खेती के लिए मशीन खरीदना, तो लोन फायदेमंद हो सकता है। इससे आपकी आमदनी बढ़ेगी और EMI देना आसान होगा। लेकिन अगर लोन सिर्फ दिखावे, मोबाइल बदलने या फालतू खर्च के लिए है, तो बाद में पछताना पड़ सकता है। गांव में कई लोग शादी या त्योहार के लिए लोन लेते हैं और फिर सालों तक कर्ज चुकाते रहते हैं।
EMI न देने पर क्या होगा
अगर EMI समय पर नहीं दी, तो बैंक जुर्माना लगाता है। आपका सिबिल स्कोर खराब हो जाता है। आगे कभी भी लोन लेना मुश्किल हो जाता है। कुछ ऐप वाले रोज फोन करके परेशान भी करते हैं। इसलिए लोन लेने से पहले यह सोच लें कि हर महीने तय तारीख पर पैसा दे पाएंगे या नहीं।
गांव वालों के लिए खास सावधानी
गांव में कई लोग बिना पढ़े कागज पर साइन कर देते हैं। यह सबसे बड़ी गलती है। हमेशा ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और लेट फीस जरूर पूछें। कुछ जगह 2 से 3 हजार रुपये पहले ही काट लिए जाते हैं। मतलब आपके हाथ में 1 लाख से कम पैसा आता है, लेकिन चुकाना पूरा 1 लाख पर ब्याज के साथ पड़ता है। किसी भी ऐप या एजेंट की बात पर तुरंत भरोसा न करें। बैंक में जाकर सही जानकारी लें।
बैंक लोन और ऐप लोन में फर्क
बैंक से लोन लेने पर ब्याज थोड़ा कम होता है और नियम साफ होते हैं। ऐप से पैसा जल्दी मिलता है, लेकिन ब्याज ज्यादा हो सकता है। कई बार छिपे चार्ज भी होते हैं। गांव के लोगों के लिए बेहतर है कि पहले बैंक या सरकारी योजना की जानकारी लें। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना जैसी योजनाओं में ब्याज कम हो सकता है।
सही फैसला कैसे लें
लोन लेने से पहले अपनी महीने की कमाई और खर्च लिखकर देखें। अगर EMI देने के बाद भी घर का खर्च आराम से चल जाए, तभी लोन लें। कोशिश करें कि EMI आपकी कुल कमाई का छोटा हिस्सा हो। कभी भी सिर्फ दूसरों को देखकर लोन न लें। हर परिवार की हालत अलग होती है।
नया डिस्क्लेमर
यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। ब्याज दर, EMI और नियम बैंक या संस्था के अनुसार बदल सकते हैं। लोन लेने से पहले बैंक या वित्त सलाहकार से सही जानकारी जरूर लें। गलत निर्णय से होने वाले नुकसान के लिए लेखक जिम्मेदार नहीं है।
आखिर में सच्चाई यही है कि ₹1 लाख का पर्सनल लोन मदद भी बन सकता है और मुसीबत भी। अगर सोच-समझकर, सही जरूरत के लिए और अपनी क्षमता देखकर लिया जाए तो ठीक है। लेकिन जल्दबाजी में लिया गया लोन गांव के परिवार को लंबे समय तक कर्ज में डुबो सकता है। इसलिए फैसला हमेशा समझदारी से करें।